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2/11/2012

BHRAHMIT SATYA






Being a single protected child ,born and brought up in good environment , I was not aware of the dark side of the world,after spending almost an year outside my burrow,I get to know a different world, a different truth        
        
                                







 "भ्रह्मित सत्य  "

आये  थे हम सीधी राह में चलने 
पर बीच  में हमारे कदम   ल्ध्ख्धा गये .
अंधेरे को हमने रौशनी समझा  
और सोचने की शमता  गवा बैठे .

नशे को हमने  मौसम  समझा 
और पैसे को अपनी जरूरत 
पर  इनके पीछे भाग कर ,
ज़िन्दगी के हसीन लम्हे गवा बैठे .

मोह  को हमने प्यार कहा ,
काम से  उसेको बदनाम किया 
पर इन सब की वजह से हम कुछ
अनमोल यार गवा बैठे .

वापस देखने की कोशिश करी ,
तो हम नक्षा गवा  बैठे .
ज़िन्दगी के हम कटपुतली  थे ,
डोर  थी नशा ,पैसा  और काम .
हम शायद खुद पर ही सैयम गवा बैठे 

-अनिमेष  शाह 



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